छमरजंगर आरक्षित वन में दोपहर के समय एक घातक टकराव हुआ, जिसमें वन कर्मचारियों ने आग लगाते हुए तीन व्यक्तियों को मार डाला। वन विभाग का कहना है कि उन पर अचानक गोलीबारी का सामना करना पड़ा और उन्होंने आत्मरक्षा में ही गोली चलाई। इस घटना की सूचना मिलने के बाद राज्य सभा में सरकार ने इस कार्रवाई को वैध बताया और कहा कि वन कर्मचारियों ने अपने कर्तव्य का पालन किया।

परिवार के सदस्य इस बात से असहमत हैं कि मृतकों को शिकारियों के रूप में बताया गया, वे कहते हैं कि वे स्थानीय किसान थे जो अपने खेतों की देखभाल कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की आरोपों से ग्रामीणों में भय और अविश्वास की भावना उत्पन्न हो रही है। इस संदर्भ में, पिछले सप्ताह तेलंगाना‑आंध्र सीमा पर बाघ के दिखने की खबर ने वन विभाग की सतर्कता को बढ़ा दिया था, जहाँ वन कर्मचारियों ने गाँव वालों को सतर्क किया था।

वहीं, गारो पहाड़ियों में भी वन विभाग ने कड़ी कार्रवाई की थी, जहाँ वन अधिकारी ने अवैध कटाई और शिकार को रोकने के लिए कई अभियोजन दर्ज किए थे। इन घटनाओं ने यह स्पष्ट किया है कि वन सुरक्षा के मुद्दे अब केवल वन्यजीव संरक्षण तक सीमित नहीं रहे, बल्कि स्थानीय जनजीवन और कानूनी प्रक्रियाओं के बीच जटिल टकराव का रूप ले रहे हैं। अब छमरजंगर में भी जांच एजेंसियों को यह तय करना होगा कि क्या यह आत्मरक्षा में किया गया कार्य वैध है या नहीं, और साथ ही ग्रामीणों के अधिकारों की रक्षा के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।