कोठागुड़ेम के मनुगुरु मंडल में स्थित एक किसान ने बताया कि उसके पास मौजूद उन्नीस बकरियों ने नजदीकी धारा से पानी पीने के बाद अचानक सुस्त हो गईं और कुछ ही घंटों में उनकी मौत हो गई। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इस धारा में हाल ही में एसएससीएल के एसएमएस प्लांट से निकलने वाले कचरे का मिश्रण देखा गया है, जिससे जल का रंग और गंध दोनों बदल गए थे। बकरियों की मृत्यु के बाद किसान ने तुरंत ग्राम प्रधान और पर्यावरण विभाग को सूचित किया, परन्तु अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

पिछले कुछ हफ्तों में ओडिशा के मयूरभंज, असम के गुवाहाटी और कर्नाटक के कास में भी रहस्यमय मौतों की खबरें सामने आई थीं, जहाँ महिलाओं और बच्चों की मौतें संदेहास्पद परिस्थितियों में हुई थीं। इन घटनाओं ने स्थानीय प्रशासन पर जल और पर्यावरणीय सुरक्षा के प्रति लापरवाही का आरोप लगाया है। मनुगुरु में बकरियों की मौत को भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है, जहाँ जल प्रदूषण को सीधे पशु स्वास्थ्य से जोड़कर गंभीर चेतावनी दी जा रही है।

स्थानीय निवासियों ने एसएससीएल के प्लांट से निकले कचरे को रोकने और साफ जल स्रोत प्रदान करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि जल की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ तो न केवल पशुधन बल्कि मानव स्वास्थ्य भी खतरे में पड़ सकता है। पर्यावरण विभाग को इस मामले की त्वरित जांच करने और आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया गया है, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोका जा सके।