कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष मलिकरजुन खड़गे ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक सर्वसमावेशी मंच आयोजित करने का प्रस्ताव रखा, जिसमें सीमांकन आयोग की नई सिफ़ारिशों पर सभी राज्य और केन्द्र सरकार के प्रतिनिधियों को विचार‑विमर्श करने का अवसर मिले। खड़गे ने कहा कि वर्तमान में लोकसभा की कुल सदस्यता पाँच सौ तैंतीस है, जिसे अगले दो दशकों में बदलने की कोई ठोस योजना नहीं है, इसलिए इसे पच्चीस वर्षों तक स्थिर रखना चाहिए।
खड़गे ने यह भी कहा कि महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के लिए दो हजार उनतीस से त्रितीयांश आरक्षण लागू किया जाना चाहिए, जिससे संसद में लैंगिक संतुलन स्थापित हो सके। उन्होंने इस कदम को सामाजिक न्याय और विकास के लिए आवश्यक बताया, और कहा कि यह आरक्षण केवल महिलाओं के लिए ही नहीं, बल्कि सामाजिक समावेश के लिए भी एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
पिछले सप्ताह राजसभा में शपथ लेने के बाद खड़गे ने कई बार कहा था कि कांग्रेस अपने सदस्यों को जनता की आवाज़ उठाने के लिए अधिक सक्रिय रूप से काम करेगा। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि तेलंगाना में हालिया राजनीतिक बदलावों को देखते हुए, सभी राज्यों को समान अवसर प्रदान करने के लिए सीमांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता और समयबद्धता आवश्यक है। इस प्रकार, खड़गे की यह अपील न केवल राष्ट्रीय स्तर पर बल्कि राज्य स्तर पर भी व्यापक चर्चा का विषय बन गई है।

