गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने रविवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं पर वन्दे मातरम् के गान के दौरान अनुचित व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय गीत का सम्मान सभी नागरिकों की जिम्मेदारी है और किसी भी राजनीतिक दल को इस भावना का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए। सावंत ने यह भी कहा कि गोवा में चल रही कई सामाजिक और शैक्षिक पहलों—जैसे निजी विश्वविद्यालयों द्वारा नई‑युग की पाठ्यक्रमों का परिचय, योग को हर घर और कार्यस्थल में लाना, तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य अनुसंधान को केंद्र बनाना—इन सबका उद्देश्य नागरिकों के जीवन स्तर को उन्नत करना है, न कि राष्ट्रीय भावना को धूमिल करना।

कांग्रेस ने भाजपा के इस आरोप को तुरंत खारिज कर दिया और कहा कि सोनिया गांधी ने केवल मलिकरजुन खड़गे के लिये कुर्सी की मांग की थी, न कि किसी प्रकार की अनादरपूर्ण कार्रवाई की। उन्होंने कहा कि यह मामला राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का हिस्सा है और इस पर कोई ठोस प्रमाण नहीं है। कांग्रेस के प्रवक्ता ने कहा कि पार्टी ने हमेशा राष्ट्रीय गीत के प्रति सम्मान दिखाया है और इस तरह के आरोपों को निराधार मानते हैं।

यह विवाद गोवा की राजनीति में नई लहर लेकर आया है, जहाँ आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियां तेज़ी से चल रही हैं। सावंत की निंदा को भाजपा के समर्थकों ने सराहा, जबकि विपक्षी दल इसे राजनीतिक दांव के रूप में देख रहा है। इस बीच, गोवा के नागरिकों ने योग, स्वास्थ्य अनुसंधान और नई शैक्षिक पहलों के प्रति सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है, जो राज्य के विकास के प्रमुख स्तंभ बन रहे हैं। भविष्य में इस विवाद का राजनीतिक समीकरणों पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह देखना बाकी है।