तेलंगाना विधानसभा में बीआरएस विधायक वेमुला प्रशांत रेड्डी ने एक सार्वजनिक सभा में कहा कि रेवनथ रेड्डी सरकार ने विरोधी दल के विधायकों को निशाना बनाते हुए नैतिकता समिति सहित कई समितियों को दुरुपयोग किया है। उन्होंने बताया कि इन समितियों को वास्तविक मुद्दों की जांच के बजाय राजनीतिक दबाव बनाने के उपकरण के रूप में प्रयोग किया जा रहा है, जिससे विधायी प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न हो रही है।

यह आरोप पिछले महीनों में नैतिकता समितियों से जुड़ी कई घटनाओं से जुड़ता है। उदाहरण के तौर पर, अमेरिकी प्रथम महिला जिल बाइडेन को प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दिया गया हीरा अमेरिकी नैतिकता नियमों के तहत विवादित रहा, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि उच्च स्तर की नैतिकता समितियों को भी राजनीतिक उद्देश्यों के लिये मोड़ा जा सकता है। इसी प्रकार, राज्य के विकास कार्यों में देरी को लेकर स्थापित पैनल ने भी कम बोली और जवाबदेही की कमी की ओर इशारा किया था।

इन घटनाओं के प्रकाश में यह स्पष्ट है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाये रखने के लिये सख्त निगरानी आवश्यक है। संसद द्वारा बहु-चरणीय नेत परीक्षा की स्वीकृति और डिजिटल सुरक्षा उपायों की प्रशंसा इस बात का उदाहरण है कि जब समितियों को सही दिशा में उपयोग किया जाए तो वे सार्वजनिक हित में कार्य करती हैं। इसलिए, तेलंगाना में भी नैतिकता समिति को राजनीतिक उत्पीड़न के साधन से हटाकर वास्तविक नैतिक मूल्यांकन के लिये पुनर्स्थापित करना आवश्यक है।