पटना के लोक भवन की ओर बढ़ते हुए तेजस्वी यादव और उनके अनुयायियों ने एनईईटी पेपर लीक के विरोध में मार्च किया। पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान उन्हें रोकने के लिए कई बार चेतावनी जारी की, परन्तु जब समूह ने आगे बढ़ना जारी रखा तो तेजस्वी यादव को हिरासत में ले लिया गया। इस दौरान कई छात्र और शिक्षक भी पुलिस के साथ टकराव में शामिल हुए, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया।
आरजेडी ने तुरंत इस कार्रवाई की निंदा करते हुए पुलिस के खिलाफ कड़ी सजा की मांग की और कहा कि यह कदम लोकतांत्रिक अधिकारों के उल्लंघन के समान है। पार्टी के प्रवक्ता ने कहा कि यदि सरकार को शिक्षा प्रणाली में विश्वास नहीं है तो उसे प्रश्नपत्र लीक जैसी गंभीर समस्या को सुलझाने के बजाय विरोध को दबाने पर ध्यान नहीं देना चाहिए। इस बीच, विपक्षी नेताओं ने न्यायालय में याचिका दायर करने का इरादा भी जताया।
भाजपा के कई वरिष्ठ नेता इस प्रदर्शन की आलोचना करते हुए कहा कि छात्रों को परीक्षा के परिणामों को लेकर अति उत्सुकता नहीं दिखानी चाहिए और सरकार ने पहले ही लीक को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई भी अनियमितता पाई जाती है तो उचित जांच की जानी चाहिए, न कि प्रदर्शन को दबाने के लिए बल प्रयोग किया जाना चाहिए। इस विवाद ने राज्य में शिक्षा, सुरक्षा और लोकतांत्रिक अधिकारों के बीच संतुलन को लेकर नई बहस छेड़ दी है, और आगे की कानूनी कार्यवाही का इंतजार किया जा रहा है।

