राहुल गांधी ने यूजीसी-नेट परीक्षा में त्रुटियों के कारण तीन पेपरों को पुनः आयोजित करने के बाद केंद्र सरकार और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) पर कठोर शब्दों में हमला किया। उन्होंने कहा कि छात्रों को अब परीक्षा की लापरवाही का बोझ उठाना पड़ रहा है, जिससे उनके कई वर्षों की पढ़ाई और मेहनत बेकार हो रही है। इस संदर्भ में उन्होंने परीक्षा एजेंसी से स्पष्ट जवाबदेही की मांग की और कहा कि ऐसी लापरवाही को सहन नहीं किया जा सकता।

गांधी ने यह भी बताया कि इस प्रकार की नीतिगत चूक छात्रों के भविष्य को सीधे प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि जब सरकार शिक्षा के मूलभूत ढांचे में खामियां दिखाती है, तो यह राष्ट्रीय विकास की दिशा में एक बड़ी बाधा बन जाता है। इस बात को रेखांकित करते हुए उन्होंने पिछले दिनों में मनिपुर में हुई हिंसा पर केंद्र की ‘विभाजनकारी विचारधारा’ के आरोपों को दोहराया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उनका ध्यान केवल शिक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि समग्र राष्ट्रीय नीति पर भी है।

इन टिप्पणियों के बाद कई छात्र संगठनों ने भी समर्थन व्यक्त किया और परीक्षा पुनः आयोजित करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और त्वरित समाधान की मांग की। राहुल गांधी ने कहा कि यदि सरकार छात्रों के अधिकारों की रक्षा नहीं करती, तो यह लोकतंत्र की नींव को कमजोर कर देगा। इस प्रकार की बहु-आयामी आलोचना से यह स्पष्ट होता है कि शिक्षा, सुरक्षा और सामाजिक समरसता के मुद्दों में सरकार को अधिक जवाबदेह होना चाहिए।