रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज जबलपुर में ४७२ करोड़ रुपये मूल्य की टैंक ओवरहॉल सुविधा की आधारशिला रखी, जिसमें उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध में टैंक अभी भी अनिवार्य हथियार हैं। इस सुविधा का उद्देश्य वार्षिक ८० टी‑७२ और टी‑९० टैंकों का पुनरुद्धार करना है, जिससे भारतीय सेना की लड़ाकू शक्ति में वृद्धि होगी। यह परियोजना राष्ट्रीय रक्षा उत्पादन को सुदृढ़ करने और आयात पर निर्भरता घटाने के व्यापक लक्ष्य के साथ संरेखित है।

पिछले कुछ हफ्तों में रक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर फैली झूठी खबरों को खारिज किया था, जिसमें कहा गया था कि ऑपरेशन सिंधूर के दौरान सैनिकों की संख्या को कम करके पेश किया गया। इस संदर्भ में राजनाथ सिंह की नई पहल को सरकार की पारदर्शिता और जवाबदेही के प्रतीक के रूप में देखा गया। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर मंत्री के इस्तीफे की मांग की थी, परन्तु इस नई परियोजना ने रक्षा नीति में निरंतरता का संदेश दिया।

जबलपुर में स्थापित होने वाली इस सुविधा से न केवल टैंकों का समय पर रखरखाव संभव होगा, बल्कि इससे स्थानीय उद्योगों को भी रोजगार और तकनीकी विकास का लाभ मिलेगा। इस पहल को राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे के विकास के हिस्से के रूप में माना गया है, जो भविष्य में भारत को आत्मनिर्भर रक्षा शक्ति बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।