कॉकरॉच जनता पार्टी ने आज केंद्र सरकार पर छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को वापस लेने में अनावश्यक देरी करने का आरोप लगाया। यह आरोप पिछले कुछ हफ्तों में विभिन्न क्षेत्रों में देखी गई केंद्र की नीतियों में देरी के साथ तालमेल रखता है, जैसे कि जम्मू‑कश्मीर में पंचायत और शहरी निकाय चुनावों का टालमटोल, तथा तेलंगाना में पल्लमुरु‑रंगारेड्डी लिफ्ट इरिगेशन परियोजना और हैदराबाद मेट्रो रेल के विस्तार में हुई बाधाएँ। इन सभी मामलों में केंद्र की कार्रवाई में अनिच्छा या विलंब ने स्थानीय जनता में निराशा बढ़ा दी है।
पार्टी ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एक उच्चस्तरीय समिति, जो पुलिस के अत्यधिक बल प्रयोग और हिंसा की जांच करेगी, उसमें कॉकरॉच जनता पार्टी को प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। यह मांग पिछले राष्ट्रीय परामर्श में वन अधिकार अधिनियम के तहत सामुदायिक वन अधिकारों की सुनवाई में हुई देरी के समान है, जहाँ विभिन्न सामाजिक समूहों को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला था। पार्टी का मानना है कि न्यायिक प्रक्रिया में सभी पक्षों की आवाज़ सुनना आवश्यक है, ताकि पुलिस के दुरुपयोग को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जा सकें।
इन आरोपों के राजनीतिक प्रभाव को देखते हुए, तेलंगाना में आगामी चुनावों की तैयारी भी तेज़ हो रही है। बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामाराव ने पहले ही कांग्रेस सरकार पर विभिन्न विकास परियोजनाओं में देरी का आरोप लगाया था, और अब कॉकरॉच जनता पार्टी इस मुद्दे को और व्यापक बनाते हुए केंद्र की नीतियों पर सवाल उठा रही है। यदि केंद्र इस देरी को समाप्त नहीं करता, तो यह न केवल न्यायिक प्रणाली की विश्वसनीयता को प्रभावित करेगा, बल्कि राज्य में सामाजिक असंतोष को भी और बढ़ा सकता है।

