सवां के अंतिम सोमवार को भारत के प्रमुख शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की अपार भीड़ देखी गई। वाराणसी के काशी विश्वनाथ, उज्जैन के महाकालेश्वर, पुरी के जगन्नाथ निकट स्थित शिवालय और गुजरात के कई तीर्थस्थल पर जल अभिषेक और विशेष पूजा आयोजित की गई। इन सभी स्थानों पर स्थानीय प्रशासन ने भीड़‑प्रबंधन के लिए विस्तृत योजना बनाकर सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की, जिससे किसी भी असुविधा से बचा जा सके।
पिछले हफ्ते जम्मू‑कश्मीर के पीर की गली में बर्फ़ीले दृश्य और आध्यात्मिक माहौल के कारण बड़ी संख्या में पर्यटक आए थे, जबकि हिमाचल के लाहौल घाटी में उत्तर भारत की गर्मी से बचने वाले यात्रियों ने समान उत्साह दिखाया। इसी प्रकार, तुलमुल्ला में क़ीर भवानी मेले में कश्मीरी पंडितों की भारी उपस्थिति ने दर्शाया कि धार्मिक यात्राओं में सुरक्षा की कड़ी व्यवस्था के बावजूद श्रद्धा का प्रवाह नहीं रुकता। इन घटनाओं ने यह स्पष्ट किया कि भारत में धार्मिक पर्यटन का चलन निरंतर बढ़ रहा है।
इस वर्ष सवां के इस विशेष दिन पर आयोजित शिव अभिषेक ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति और शारीरिक शुद्धि का अनुभव कराया। कई राज्य सरकारों ने इस अवसर को सांस्कृतिक कार्यक्रमों और सामाजिक जागरूकता अभियानों के साथ जोड़कर एक व्यापक मंच तैयार किया। इस प्रकार, सवां के अंतिम सोमवार को आयोजित शिव पूजा न केवल धार्मिक आस्था को सुदृढ़ करती है, बल्कि देश भर में पर्यटन और सांस्कृतिक एकता को भी प्रोत्साहित करती है।

