संयुक्त राज्य के कई सांसदों ने ट्रम्प राष्ट्रपति द्वारा प्रस्तावित ५० प्रतिशत शुल्क नीति को अस्वीकार किया है, क्योंकि इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक वस्तुओं की कीमतें आसमान छू जाएँगी। उन्होंने बताया कि इस प्रकार के भारी शुल्क से उपभोक्ताओं को सीधे नुकसान होगा और छोटे व मध्यम उद्यमों की लागत में अप्रत्याशित वृद्धि होगी। इस नीति के विरोध में कई सांसदों ने संसद में विशेष सत्र का आह्वान किया है, ताकि राष्ट्रपति के एकतरफा निर्णयों पर पुनः विचार किया जा सके।
कनाडा ने इस कदम का जवाब देने के लिए समान स्तर पर प्रतिशोधी शुल्क लागू करने की घोषणा की है, जिससे व्यापारिक तनाव फिर से बढ़ गया है। पिछले वर्ष के अंत में दोनों देशों ने अपने राजनयिक प्रतिनिधियों को पुनः नियुक्त किया था और कई क्षेत्रों में सहयोग को सुदृढ़ करने की आशा जताई थी। हालांकि, इस नई शुल्क नीति ने उन प्रयासों को नष्ट कर दिया है और दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
इस स्थिति में कांग्रेस को राष्ट्रपति के शुल्क निर्णयों पर पुनः अधिकार प्राप्त करने की मांग तेज हो गई है। सांसदों का कहना है कि राष्ट्रीय आर्थिक हितों की रक्षा के लिए संसद को इस प्रकार के बड़े आर्थिक कदमों में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। साथ ही, व्यापार विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि यह तनाव जारी रहा तो दोनों देशों के निर्यात‑आयात के आंकड़े घट सकते हैं और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान उत्पन्न हो सकता है।

