तेलंगाना सरकार ने हाल ही में यदागिरिगुट्टा देवस्थान बोर्ड के १८ सदस्यीय गठन और मुंबई में एफडीए द्वारा छह भोजनालयों पर कार्रवाई जैसे कई कदम उठाए हैं, जिससे राज्य में सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ी है। साथ ही, केंद्र के औषधि गुणवत्ता निगरानी रिपोर्ट में कश्मीर से प्राप्त दवाओं में दोष पाए जाने से औषधि नियंत्रण की आवश्यकता पर प्रकाश पड़ा। इन पृष्ठभूमि को देखते हुए, सरकार ने खाद्य‑औषधि सुरक्षा को एकीकृत करने का निर्णय लिया।
नए गठित संस्था का नाम टीजी सेफ रखा गया है, जिसमें खाद्य सुरक्षा विभाग और औषधि नियंत्रण विभाग को मिलाकर एक ही प्राधिकरण बनाया गया है। इस प्राधिकरण के प्रमुख के रूप में अविनाश मोहनती आयुक्त को नियुक्त किया गया है, जो लाइसेंस जारी करने, नियमित निरीक्षण, परीक्षण सुविधाओं का प्रबंधन, नियमों का प्रवर्तन तथा प्रशासनिक आधुनिकीकरण की देखरेख करेंगे। छह पंखों वाली यह संस्था राज्य के सभी जिलों में समान रूप से कार्य करेगी।
टीजी सेफ के गठन से अपेक्षा की जा रही है कि खाद्य पदार्थों और दवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा, काली बाजार में गिरावट आएगी और उपभोक्ताओं को सुरक्षित उत्पाद मिलेंगे। यह संस्था नई तकनीकों और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से लाइसेंस प्रक्रिया को तेज़ और पारदर्शी बनाएगी, जिससे छोटे व्यापारियों को भी लाभ होगा। अंततः, यह कदम तेलंगाना के नागरिकों के स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।

