तेलंगाना सरकार ने निजी मेडिकल व डेंटल संस्थानों में एमबीबीएस व बीडीएस पाठ्यक्रमों की ट्यूशन फीस को २०२६‑२९ ब्लॉक अवधि के लिए अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया। यह निर्णय टेलेफ्रांसफर एग्रीमेंट फॉर रेगुलेशन कमेटी (टीएएफआरसी) की सिफ़ारिशों के अनुरूप है, जिसने छात्रों के आर्थिक बोझ को कम करने की आवश्यकता पर बल दिया। सरकार का यह कदम केरल में हाल ही में लागू किए गए समान निर्देशों से प्रेरित है, जहाँ निजी मेडिकल व डेंटल कॉलेजों को चार साल आधे महीने की अवधि के लिए ही शुल्क वसूलने का आदेश दिया गया था।

कमीशन ने यह भी बताया कि बी‑श्रेणी के कॉलेजों में शुल्क अभी भी अपेक्षाकृत अधिक है, जिससे छात्रों और उनके परिवारों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इस संदर्भ में, केरल सरकार ने निजी संस्थानों को राष्ट्रीय मेडिकल कमिशन के सार्वजनिक नोटिस का पालन करने का निर्देश दिया था, जिससे शुल्क संरचना में पारदर्शिता आई। तेलंगाना में भी इसी दिशा में कदम उठाते हुए, सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि कोई अतिरिक्त शुल्क वृद्धि न हो, जिससे छात्रों को आर्थिक अस्थिरता से बचाया जा सके।

इन नीतियों के साथ ही, हाल ही में त्रिशूर में एक निजी मेडिकल कॉलेज के छात्रा के १४वीं मंजिल से गिरने की दुखद घटना ने सुरक्षा और छात्र कल्याण के मुद्दों को भी उजागर किया है। इस घटना ने प्रशासन को छात्रावास सुरक्षा मानकों को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया। इसलिए, टेलेफ्रांसफर एग्रीमेंट फॉर रेगुलेशन कमेटी ने न केवल शुल्क पर ध्यान दिया, बल्कि संस्थानों में सुरक्षा उपायों को भी सुदृढ़ करने की सिफ़ारिश की है, जिससे शिक्षा का माहौल सुरक्षित और सुलभ बन सके।