ट्रम्प प्रशासन ने पिछले कुछ महीनों में कई बार व्यापारिक शुल्कों को हथियार बनाकर विभिन्न देशों को दबाव में लाने की कोशिश की है। जून २०२६ में भारत को १०० प्रतिशत शुल्क की सम्भावना पर चर्चा हुई थी, परन्तु बाजार की प्रतिक्रिया और सीमित प्रभाव के कारण वह कदम पूरी तरह नहीं उठाया गया। इसी क्रम में, ट्रम्प ने अब कनाडा से आयातित वस्तुओं पर पचास प्रतिशत शुल्क लागू कर दिया, जिससे दोनो देशों के बीच आर्थिक तनाव बढ़ गया।
कनाडा ने इस कदम का प्रतिकार करने के लिए ८ सितंबर से समान दर पर शुल्क लगाने का इरादा जताया है, जिससे लगभग बीस अरब डॉलर मूल्य की वस्तुएँ दोनों पक्षों के व्यापार में बाधित होंगी। इस प्रतिशोधी नीति से भारतीय निर्यातकों को भी अप्रत्यक्ष रूप से असर महसूस हो सकता है, क्योंकि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव आएगा। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि इस प्रकार के निरंतर शुल्क युद्ध से व्यापारियों की लागत बढ़ेगी और उपभोक्ताओं को महँगी वस्तुएँ खरीदनी पड़ेंगी।
इस व्यापारिक टकराव के बीच महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने 'ऑपरेशन टाइगर' की सफलता का उल्लेख किया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि घरेलू राजनीति भी अंतरराष्ट्रीय आर्थिक नीतियों से प्रभावित हो रही है। शिंदे ने कहा कि वे किसी भी अधूरे कार्य को नहीं छोड़ते, और यह बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे व्यापारिक संघर्षों के प्रति भारत की सतर्कता को दर्शाता है। कुल मिलाकर, ट्रम्प के शुल्क नीति ने न केवल अमेरिका-कनाडा संबंधों को बल्कि वैश्विक व्यापार माहौल को भी अस्थिर कर दिया है।

