दिल्ली पुलिस ने सर्वोच्च न्यायालय में यह स्पष्ट किया कि जुलाई‑20 को “चलो संसद” नामक प्रदर्शन में कई इतिहास‑शीतर्स ने घुसपैठ की, जिससे प्रदर्शन में हिंसा उत्पन्न हुई और सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ गई। पुलिस ने बताया कि इस हिंसा के कारण दो‑सौ से अधिक सहकर्मियों को विभिन्न प्रकार की चोटें आईं, जिनमें सिर‑दर्द, हड्डी‑टूटना और शारीरिक क्षति शामिल है। इस संदर्भ में पुलिस ने कहा कि उन्होंने अनुशासनहीन भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक बल प्रयोग किया, जो कि कानून के दायरे में था।

पिछले हफ्तों में देश भर में विभिन्न प्रकार के प्रदर्शन और विरोध देखे गए हैं, जैसे जम्मू‑कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस द्वारा हैंडवारा में आयोजित विरोध और दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा आयोजित हड़ताल। इन घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों पर अतिरिक्त दबाव डाला है, जिससे उन्होंने प्रदर्शन में संभावित घुसपैठियों की पहचान और रोकथाम को प्राथमिकता दी। इस परिप्रेक्ष्य में, दिल्ली पुलिस ने कहा कि इतिहास‑शीतर्स की सक्रियता ने इस बार के प्रदर्शन को अधिक जोखिमपूर्ण बना दिया।

सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले की गहन जांच का आदेश दिया और पुलिस को सभी संबंधित दस्तावेज़ और वीडियो साक्ष्य प्रस्तुत करने को कहा। अदालत ने यह भी कहा कि यदि बल प्रयोग में कोई अनियमितता पाई गई तो उचित कार्रवाई की जाएगी। इस बीच, पुलिस ने कहा कि वह न्यायालय के आदेशों का पालन करते हुए पारदर्शिता बनाए रखेगी और भविष्य में ऐसे घटनाओं को रोकने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय अपनाएगी।