दलित बंधु योजना को तेलंगाना में पाँच वर्ष हो चुके हैं, जिसका उद्देश्य सामाजिक व आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों को आय‑सृजन के साधन प्रदान करना था। पूर्व बीआरएस सरकार ने इस योजना के तहत कई लाभार्थियों को छोटे उद्यम स्थापित करने के लिये प्रारम्भिक पूँजी दी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़े और गरीबी में कमी आई। इस पहल को राज्य के पोषण अभियान जैसे "पोषण पखवाड़ा" के साथ मिलाकर सामाजिक सुरक्षा के व्यापक ढाँचे में रखा गया था, जिससे महिलाओं और बच्चों के पोषण स्तर में उल्लेखनीय सुधार देखा गया।
कांग्रेस सरकार ने इस योजना को आगे बढ़ाते हुए आर्थिक सहायता को दस लाख रुपये से बढ़ाकर बारह लाख रुपये करने का वादा किया, परन्तु अब तक वह वादा पूरा नहीं हुआ है। कई लाभार्थियों ने बताया कि वित्तीय सहायता में देरी ने उनके छोटे व्यापारों को संकट में डाल दिया है, जिससे आय में गिरावट और ऋण का बोझ बढ़ गया है। इस असंतोष ने सामाजिक असमानता के मुद्दे को फिर से उजागर किया है, क्योंकि आर्थिक सहायता के अभाव में दलित समुदाय के कई सदस्य अपने मूलभूत जरूरतों को पूरा करने में कठिनाई का सामना कर रहे हैं।
राजनीतिक दृष्टिकोण से यह स्थिति कांग्रेस सरकार के प्रति भरोसे को कमजोर कर रही है, जबकि राज्य में अन्य कल्याणकारी कार्यक्रम जैसे पोषण अभियान और महिला सशक्तिकरण योजनाएँ सफलतापूर्वक चल रही हैं। विपक्षी दल और सामाजिक संगठनों ने सरकार से तत्काल कार्यवाही की मांग की है, ताकि वादे किए गये वित्तीय समर्थन को शीघ्रता से लागू किया जा सके। इस मुद्दे पर पारदर्शी लेखा‑जाँच और लाभार्थियों की वास्तविक जरूरतों को समझते हुए नीतियों का पुनः मूल्यांकन आवश्यक है, ताकि सामाजिक न्याय की प्राप्ति सुनिश्चित हो सके।

