कश्यप सन्देश

21 May 2026

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देश और उत्तर प्रदेश के नागरिकों को मिले मुफ्त शिक्षा और मुफ्त चिकित्सा की सुविधा


उत्तर प्रदेश के प्रत्येक नागरिक और उनके परिवार को बेहतर जीवन का अधिकार है। राज्य सरकार को चाहिए कि गरीब, मजदूर, किसान, पिछड़े, वंचित एवं मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चों को निशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जाए, ताकि कोई भी बच्चा आर्थिक अभाव के कारण शिक्षा से वंचित न रहे।
इसी प्रकार प्रदेश के सभी नागरिकों को सरकारी अस्पतालों में मुफ्त एवं बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। गंभीर बीमारियों के इलाज, दवाइयों, जांचों और ऑपरेशन की व्यवस्था पूरी तरह निशुल्क हो, जिससे गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ न पड़े।
शिक्षा और स्वास्थ्य किसी भी समाज की सबसे बड़ी ताकत होते हैं। यदि प्रदेश का हर नागरिक शिक्षित और स्वस्थ होगा, तभी उत्तर प्रदेश विकास की नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।

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आर.सी.निषाद — संपादक
कश्यप संदेश अख़बार, परिवार कानपुर

हरदोई में न्यू सनबीम स्कूल विवाद: प्रिंसिपल पर रोक के बाद भी नहीं थमा आक्रोश

अभिभावकों से माफी के बावजूद शिक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

हरदोई।
जनपद हरदोई के एसपी तिराहा स्थित New Sunbeam School में प्रिंसिपल ममता मिश्रा और एक अभिभावक के बीच हुए विवाद का मामला अब प्रशासनिक कार्रवाई तक पहुंच गया है। कॉपियां बाहर से खरीदने को लेकर हुए इस विवाद का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आया और प्रिंसिपल को स्कूल आने से रोक दिया गया है।
अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन द्वारा किताबें और कॉपियां केवल तय दुकानों से खरीदने का दबाव बनाया जाता है, जिससे कमीशनखोरी का खेल चलता है। विरोध करने पर अभिभावकों के साथ अभद्र व्यवहार किया जाता है, जिससे नाराजगी बढ़ती जा रही है।
BSA का सख्त एक्शन: प्रिंसिपल के स्कूल आने पर रोक
हरदोई के बेसिक शिक्षा अधिकारी अजीत सिंह ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रिंसिपल ममता मिश्रा को तत्काल प्रभाव से स्कूल आने से रोक दिया है और पूरे मामले की जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी स्कूल को अभिभावकों पर किसी विशेष दुकान से कॉपी-किताब खरीदने का दबाव बनाने का अधिकार नहीं है।

विवाद की जड़: बाहर से कॉपियां खरीदने पर धमकी का आरोप

जानकारी के अनुसार, यूकेजी के छात्र की मां द्वारा कॉपियां बाहर से खरीदने पर प्रिंसिपल ने कथित रूप से अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया और बच्चे का नाम काटने की धमकी दी।
वीडियो में दिखा व्यवहार अभिभावकों को बेहद आपत्तिजनक लगा, जिससे पूरे इलाके में आक्रोश फैल गया।
विद्यार्थी परिषद का घेराव, प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव

घटना के बाद छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने स्कूल पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया और प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की।
इस प्रदर्शन के बाद प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव और बढ़ गया।

माफी के बाद भी खत्म नहीं हुआ असंतोष

विवाद बढ़ने और वीडियो वायरल होने के बाद प्रिंसिपल ने अभिभावकों से माफी मांग ली, लेकिन अभिभावकों का कहना है कि केवल माफी से समस्या का समाधान नहीं होगा।
उनका मानना है कि यह मामला पूरे प्रदेश में निजी स्कूलों की मनमानी व्यवस्था का प्रतीक है, जहां शिक्षा सेवा के बजाय व्यापार बनती जा रही है।
⚖️ कौन-कौन से नियमों का हो सकता है उल्लंघन
इस मामले में संभावित रूप से निम्न नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है:
शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम 2009 — अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक दबाव बनाना नियमों के खिलाफ है।
उत्तर प्रदेश शिक्षा विभाग के निर्देश — स्कूल किसी विशेष दुकान से किताब/कॉपी खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकते।
उपभोक्ता अधिकार कानून — मनमाने तरीके से सामान खरीदने के लिए मजबूर करना अनुचित व्यापार की श्रेणी में आ सकता है।
शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की जरूरत
हरदोई का यह मामला केवल एक स्कूल का विवाद नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही का बड़ा मुद्दा बन गया है।
यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति होती रहेगी और अभिभावकों का भरोसा कमजोर होता जाएगा।

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