कश्यप सन्देश

22 May 2026

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देश और उत्तर प्रदेश के नागरिकों को मिले मुफ्त शिक्षा और मुफ्त चिकित्सा की सुविधा


उत्तर प्रदेश के प्रत्येक नागरिक और उनके परिवार को बेहतर जीवन का अधिकार है। राज्य सरकार को चाहिए कि गरीब, मजदूर, किसान, पिछड़े, वंचित एवं मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चों को निशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जाए, ताकि कोई भी बच्चा आर्थिक अभाव के कारण शिक्षा से वंचित न रहे।
इसी प्रकार प्रदेश के सभी नागरिकों को सरकारी अस्पतालों में मुफ्त एवं बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। गंभीर बीमारियों के इलाज, दवाइयों, जांचों और ऑपरेशन की व्यवस्था पूरी तरह निशुल्क हो, जिससे गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ न पड़े।
शिक्षा और स्वास्थ्य किसी भी समाज की सबसे बड़ी ताकत होते हैं। यदि प्रदेश का हर नागरिक शिक्षित और स्वस्थ होगा, तभी उत्तर प्रदेश विकास की नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।

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आर.सी.निषाद — संपादक
कश्यप संदेश अख़बार, परिवार कानपुर

हूल दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संथाल विद्रोह के अमर सेनानियों को दी श्रद्धांजलि

नई दिल्ली, 30 जून 2024 – राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज ‘हूल दिवस’ के अवसर पर संथाल विद्रोह के सभी अमर सेनानियों को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर राष्ट्रपति मुर्मू ने संथाल विद्रोह के सेनानियों के साहस और बलिदान को याद किया और कहा कि उनका संघर्ष भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।

राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संदेश में कहा, “संथाल विद्रोह 1855 में ब्रिटिश शासन के खिलाफ हुआ एक प्रमुख आंदोलन था, जिसने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस विद्रोह ने हमें एकता, साहस और न्याय के लिए लड़ने की प्रेरणा दी है। हम सभी को इन वीर सेनानियों की शहादत को सदैव स्मरण रखना चाहिए।”

संथाल विद्रोह, जिसे ‘हूल विद्रोह’ के नाम से भी जाना जाता है, 1855-1856 में संथाल आदिवासियों द्वारा ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के अत्याचारों के खिलाफ छेड़ा गया था। इस विद्रोह का नेतृत्व सिद्धो-कान्हू और चांद-भैरव जैसे वीर सेनानियों ने किया था। उनका बलिदान और संघर्ष भारतीय इतिहास में हमेशा अमर रहेगा।

राष्ट्रपति मुर्मू ने इस अवसर पर संथाल समाज के उत्थान और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा, “हमें संथाल समाज के विकास और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए। यही हमारे वीर सेनानियों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।”

राष्ट्रपति मुर्मू के इस संदेश ने संथाल विद्रोह के वीर सेनानियों को सम्मानित करते हुए भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इस महत्वपूर्ण अध्याय को फिर से जीवित कर दिया है।

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