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13 February 2026

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उत्पीड़न व अन्याय से परेशान सेवानिवृत्त सहायक अभियंता मदन गोपाल ने सर्वोच्च न्यायालय से लगाई न्याय की गुहार

कालपी/झांसी।
उत्पीड़न, अन्याय और वर्षों से चली आ रही विभागीय प्रताड़ना से परेशान एक सेवानिवृत्त सहायक अभियंता ने अब सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। पीड़ित अभियंता का कहना है कि सेवानिवृत्ति के 8वर्ष बाद भी उन्हें लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है और वर्षों से न्याय के लिए भटकना पड़ रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार कालपी धाम क्षेत्र के ब्लॉक महेवा के ग्राम शेखपुर गुढ़ा निवासी रिटायर्ड सहायक अभियंता मदन गोपाल ने देश के सर्वोच्च न्यायालय से न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने बताया कि उन्होंने रुड़की विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग की उच्च शिक्षा प्राप्त की और विषम पारिवारिक परिस्थितियों के बावजूद लोक निर्माण विभाग में सेवा दी।

1984 में हुई नियुक्ति, 33 वर्षों की सेवा
मदन गोपाल के अनुसार वर्ष 1984 में उनकी नियुक्ति लोक निर्माण विभाग में सहायक अभियंता (सिविल) के पद पर हुई। उन्होंने विभाग में लगभग 33 वर्षों तक ईमानदारीपूर्वक सेवा दी। लेकिन सेवा के दौरान एवं उसके बाद उन्हें लगातार मानसिक, प्रशासनिक और विभागीय प्रताड़ना का सामना करना पड़ा।

आरक्षण की मांग और संघर्ष बना वजह
पीड़ित अभियंता का कहना है कि वे जिस समाज से आते हैं, वह लंबे समय से आरक्षण और अधिकारों की मांग कर रहा है। इसी क्रम में उन्होंने भी आवाज उठाई, जिसके बाद उन्हें विभागीय स्तर पर निशाना बनाया गया।
उनका आरोप है कि उन्होंने इलाहाबाद स्तर तक न्याय की लड़ाई लड़ी, लेकिन लगभग 19 वर्षों तक उन्हें न्याय नहीं मिल सका।
सेवानिवृत्ति के बाद भी प्रताड़ना,
मदन गोपाल ने बताया कि वे 2017 में सेवानिवृत्त हुए, लेकिन सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा है। उनके अनुसार कई वर्षों तक पदोन्नति और लाभ रोके गए तथा उन्हें अपमानित करने की कोशिशें की जाती रहीं।
स्वास्थ्य पर पड़ा गहरा असर
उन्होंने बताया कि वर्षों से चले आ रहे तनाव, प्रताड़ना और आर्थिक-मानसिक दबाव के कारण वे पिछले कुछ समय से गंभीर बीमारी से ग्रस्त हैं। उनका कहना है कि लगातार अन्याय और दबाव ने उनके जीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है।
अब सर्वोच्च न्यायालय से न्याय की उम्मीद
पीड़ित सेवानिवृत्त अभियंता ने बताया कि वे अब न्याय के लिए सर्वोच्च न्यायालय पहुँचे हैं और उन्हें उम्मीद है कि देश की सर्वोच्च अदालत से उन्हें न्याय मिलेगा।

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