कश्यप सन्देश

25 May 2026

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देश और उत्तर प्रदेश के नागरिकों को मिले मुफ्त शिक्षा और मुफ्त चिकित्सा की सुविधा


उत्तर प्रदेश के प्रत्येक नागरिक और उनके परिवार को बेहतर जीवन का अधिकार है। राज्य सरकार को चाहिए कि गरीब, मजदूर, किसान, पिछड़े, वंचित एवं मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चों को निशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जाए, ताकि कोई भी बच्चा आर्थिक अभाव के कारण शिक्षा से वंचित न रहे।
इसी प्रकार प्रदेश के सभी नागरिकों को सरकारी अस्पतालों में मुफ्त एवं बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। गंभीर बीमारियों के इलाज, दवाइयों, जांचों और ऑपरेशन की व्यवस्था पूरी तरह निशुल्क हो, जिससे गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ न पड़े।
शिक्षा और स्वास्थ्य किसी भी समाज की सबसे बड़ी ताकत होते हैं। यदि प्रदेश का हर नागरिक शिक्षित और स्वस्थ होगा, तभी उत्तर प्रदेश विकास की नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।

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आर.सी.निषाद — संपादक
कश्यप संदेश अख़बार, परिवार कानपुर

ओम बिरला की आपातकाल पर टिप्पणी उचित नहीं, लोकसभा अध्यक्ष की गरिमा के अनुकूल नहीं: शरद पवार

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के प्रमुख शरद पवार ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की आपातकाल पर की गई टिप्पणियों को अनुचित बताया है। पवार का कहना है कि इस प्रकार की टिप्पणियां लोकसभा अध्यक्ष की गरिमा के अनुकूल नहीं हैं।

ओम बिरला ने हाल ही में आपातकाल की आलोचना करते हुए इसे भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय करार दिया था। उनकी इस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए शरद पवार ने कहा, “लोकसभा अध्यक्ष को अपने पद की गरिमा बनाए रखनी चाहिए और संवैधानिक मर्यादाओं का पालन करना चाहिए। आपातकाल की घटनाओं पर टिप्पणी करना उनका काम नहीं है।”

शरद पवार ने आगे कहा कि ओम बिरला को अपने पद की निष्पक्षता और गरिमा को बनाए रखना चाहिए। उन्होंने कहा, “लोकसभा अध्यक्ष को सभी दलों के प्रति समान सम्मान दिखाना चाहिए और विवादास्पद विषयों पर सार्वजनिक बयान देने से बचना चाहिए।”

पवार के इस बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। विपक्षी दलों ने भी शरद पवार के बयान का समर्थन किया है और ओम बिरला से अपनी टिप्पणियों पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पवार के बयान को अनुचित बताते हुए कहा है कि ओम बिरला ने केवल ऐतिहासिक सच्चाई को उजागर किया है।

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब देश में राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़ रहा है। शरद पवार के बयान ने लोकसभा अध्यक्ष के पद की भूमिका और जिम्मेदारियों पर एक नई बहस छेड़ दी है।

देखना होगा कि ओम बिरला इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्या यह मुद्दा संसद के आगामी सत्र में उठेगा। यह विवाद निश्चित रूप से आगामी राजनीतिक चर्चाओं को प्रभावित करेगा।

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