कश्यप सन्देश

23 May 2026

ट्रेंडिंग

देश और उत्तर प्रदेश के नागरिकों को मिले मुफ्त शिक्षा और मुफ्त चिकित्सा की सुविधा


उत्तर प्रदेश के प्रत्येक नागरिक और उनके परिवार को बेहतर जीवन का अधिकार है। राज्य सरकार को चाहिए कि गरीब, मजदूर, किसान, पिछड़े, वंचित एवं मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चों को निशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जाए, ताकि कोई भी बच्चा आर्थिक अभाव के कारण शिक्षा से वंचित न रहे।
इसी प्रकार प्रदेश के सभी नागरिकों को सरकारी अस्पतालों में मुफ्त एवं बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। गंभीर बीमारियों के इलाज, दवाइयों, जांचों और ऑपरेशन की व्यवस्था पूरी तरह निशुल्क हो, जिससे गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ न पड़े।
शिक्षा और स्वास्थ्य किसी भी समाज की सबसे बड़ी ताकत होते हैं। यदि प्रदेश का हर नागरिक शिक्षित और स्वस्थ होगा, तभी उत्तर प्रदेश विकास की नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।

कृपया इस नंबर पर अपनी राय जरूर भजे  (हाँ) या (नहीं) लिखकर
6387840496
आर.सी.निषाद — संपादक
कश्यप संदेश अख़बार, परिवार कानपुर

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल डॉ. सी. वी. आनंद बोस ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ मानहानि का मामला दायर किया

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल डॉ. सी. वी. आनंद बोस ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ कोलकाता उच्च न्यायालय में मानहानि का मामला दायर किया है। ममता बनर्जी ने राज्य सचिवालय नबन्ना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में टिप्पणी की थी कि महिलाएं कोलकाता के राजभवन जाने से डरती हैं।

राज्यपाल बोस ने मानहानि का मामला दर्ज करने से पहले सीएम ममता बनर्जी की आलोचना की और कहा कि सार्वजनिक प्रतिनिधियों से अपेक्षा की जाती है कि वे गलत और अपमानजनक छाप न छोड़ें। उन्होंने बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस पार्टी के कुछ नेताओं के खिलाफ भी इसी तरह के बयान देने पर मानहानि के मामले दर्ज किए हैं।

यह विवाद तब सामने आया जब 2 मई को राजभवन की एक संविदा महिला कर्मचारी ने बोस पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया, जिसके बाद कोलकाता पुलिस ने जांच शुरू की। इस घटना के बाद से राजनीतिक माहौल गरमा गया है। राज्यपाल बोस ने ममता बनर्जी के बयानों को झूठा और अपमानजनक बताते हुए कहा कि ऐसे आरोपों का कोई आधार नहीं है और यह केवल उनके प्रतिष्ठा को धूमिल करने का प्रयास है।

तृणमूल कांग्रेस ने इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने मुख्यमंत्री का समर्थन किया है और राज्यपाल के कदम की निंदा की है। वहीं, विपक्षी दलों ने इस विवाद को लेकर राज्य सरकार और तृणमूल कांग्रेस पर हमला बोला है, इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ बताया है।

यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह कानूनी लड़ाई किस दिशा में आगे बढ़ती है और इसके राजनीतिक परिणाम क्या होते हैं।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top