कश्यप सन्देश

25 May 2026

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देश और उत्तर प्रदेश के नागरिकों को मिले मुफ्त शिक्षा और मुफ्त चिकित्सा की सुविधा


उत्तर प्रदेश के प्रत्येक नागरिक और उनके परिवार को बेहतर जीवन का अधिकार है। राज्य सरकार को चाहिए कि गरीब, मजदूर, किसान, पिछड़े, वंचित एवं मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चों को निशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जाए, ताकि कोई भी बच्चा आर्थिक अभाव के कारण शिक्षा से वंचित न रहे।
इसी प्रकार प्रदेश के सभी नागरिकों को सरकारी अस्पतालों में मुफ्त एवं बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। गंभीर बीमारियों के इलाज, दवाइयों, जांचों और ऑपरेशन की व्यवस्था पूरी तरह निशुल्क हो, जिससे गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ न पड़े।
शिक्षा और स्वास्थ्य किसी भी समाज की सबसे बड़ी ताकत होते हैं। यदि प्रदेश का हर नागरिक शिक्षित और स्वस्थ होगा, तभी उत्तर प्रदेश विकास की नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।

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आर.सी.निषाद — संपादक
कश्यप संदेश अख़बार, परिवार कानपुर

एकलव्य: एक महान योद्धा : भाग -2 : ए. के. चौधरी की कलम से

लगातार अभ्यास से एकलव्य ने धनुर्विद्या में अपार निपुणता प्राप्त की। एक दिन, जब पांडव और कौरव गुरु द्रोण के साथ शिकार करने जंगल पहुंचे, उनके साथ एक कुत्ता भी था। वह कुत्ता एकलव्य के आश्रम में जा पहुंचा और भौंकने लगा। एकलव्य ने अपने बाणों से बिना चोट पहुंचाए कुत्ते का मुंह बंद कर दिया। धनुर्विद्या के इस अद्वितीय कौशल को देख गुरु द्रोणाचार्य चकित रह गए और एकलव्य के पास पहुंचे।

गुरु द्रोण को लगा कि एकलव्य अर्जुन से श्रेष्ठ धनुर्धर बन सकता है। इस भय से उन्होंने गुरु दक्षिणा में एकलव्य से उसका दायां अंगूठा मांग लिया। अंगूठा कटने के बावजूद, एकलव्य ने हार नहीं मानी और तर्जनी और मध्यमा अंगुली का उपयोग कर तीर चलाने लगा। यह तकनीक तीरंदाजी के आधुनिक तरीके का जन्म थी।

एक प्रचलित कथा के अनुसार, एकलव्य श्री कृष्ण के शत्रु जरासंध के साथ मिल गया और मथुरा पर आक्रमण कर दिया। उसने यादव सेना के अधिकांश योद्धाओं को मार दिया। श्री कृष्ण जानते थे कि यदि एकलव्य जीवित रहा, तो महाभारत युद्ध में कौरवों की ओर से लड़ते हुए पांडवों के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। अंततः, श्री कृष्ण और एकलव्य के बीच एक भीषण युद्ध हुआ जिसमें एकलव्य वीरगति को प्राप्त हुआ।

इस प्रकार, एकलव्य ने अपनी अदम्य इच्छाशक्ति और संकल्प से इतिहास में एक अमिट छाप छोड़ी, जिससे न केवल तीरंदाजी के नए तरीके का जन्म हुआ, बल्कि उसकी महानता और बलिदान की कथा आज भी हमें प्रेरित करती है।

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