कश्यप सन्देश

23 May 2026

ट्रेंडिंग

देश और उत्तर प्रदेश के नागरिकों को मिले मुफ्त शिक्षा और मुफ्त चिकित्सा की सुविधा


उत्तर प्रदेश के प्रत्येक नागरिक और उनके परिवार को बेहतर जीवन का अधिकार है। राज्य सरकार को चाहिए कि गरीब, मजदूर, किसान, पिछड़े, वंचित एवं मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चों को निशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जाए, ताकि कोई भी बच्चा आर्थिक अभाव के कारण शिक्षा से वंचित न रहे।
इसी प्रकार प्रदेश के सभी नागरिकों को सरकारी अस्पतालों में मुफ्त एवं बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। गंभीर बीमारियों के इलाज, दवाइयों, जांचों और ऑपरेशन की व्यवस्था पूरी तरह निशुल्क हो, जिससे गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ न पड़े।
शिक्षा और स्वास्थ्य किसी भी समाज की सबसे बड़ी ताकत होते हैं। यदि प्रदेश का हर नागरिक शिक्षित और स्वस्थ होगा, तभी उत्तर प्रदेश विकास की नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।

कृपया इस नंबर पर अपनी राय जरूर भजे  (हाँ) या (नहीं) लिखकर
6387840496
आर.सी.निषाद — संपादक
कश्यप संदेश अख़बार, परिवार कानपुर

बीएसपी ने आरक्षण के उप वर्गीकरण को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने को डीएम द्वारा राष्ट्रपति को ज्ञापन

आरक्षण को 9वींअनुसूची में डाला जाए- बहुजन समाज पार्टी

कानपुर नगर से बहुजन समाज पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं ने आरक्षण के उप वर्गीकरण को समाप्त करने की उठाई मांग जिसमें हजारों कार्यकर्ताओं ने भारत बंद कर विरोध प्रदर्शन किया कहां की सुप्रीम कोर्ट के आदेश दिनांक 1 अगस्त 2024 “आरक्षण में उपवर्गीकरण एवं क्रिमिलेयर लागू करने के आदेश को तत्काल अध्यादेश लाकर समाप्त कर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजातीय वर्ग में अपने भविष्य के लिए भयभीत स्थिति से बचाने बावत आरक्षण विषय को 9वीं अनुसूची में डाला जाए।महामहिम, सर्वविधित है कि मा. सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण में उप-वर्गीकरण करने एवं क्रिमिलयर लगाने अगत 2024 को SC/ST वर्गों के सम्बन्धी आदेश दिया था जिससे MOST वर्ग के करोड़ो लोगों के संवैधानिक अधिकार खत्तरे में पड़ गए है। SC/ST वर्गों को संविधान के अनुच्छेद 15 (4) एवं 16 (4) में सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़ेपन के लिए आरक्षण (प्रतिनिधित्व) देने की व्यवस्था की गई है, न कि आर्थिक आधार पर। मा सुप्रीम कोर्ट ने इन वर्गों के आरक्षण में क्रिमिलियर लगाने एवं उपवर्गीकरण करने का अधिकार राज्य सरकारों को दे दिया है जबकि अनुच्छेद 341 एवं 342 के तहत किसी जाति उपजाति को SC/ST वर्ग की सूची में जोड़कर आरक्षण के दायरे में लाने या आरक्षण के दायरे से बाहर करने का अधिकार महामहिम राष्ट्रपति महोदय/केंद्र सरकार को है। न कि राज्य सरकार को वर्तमान में कुछ प्रदेश निश्चित ही इस आदेश के अनुसार अपनी अपनी तैयारी में लग गये होंगे जैसा की अनुसूचित जाति जनजातिय वर्ग के देश के हर राज्यों एवं केंद्र के खाली पड़े लाखों बैकलॉग पदों से नियत समझ आ रही है। और वैसे भी मा. सुप्रीम कोर्ट का उक्त निर्णय SC/ST वर्ग के संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ होकर पूर्णतः गैर- संवैधानिक है।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top