

इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर थी पीआईएल
पहसा (मऊ)। मऊ जनपद में निवासरत गोंड जनजाति समुदाय के जाति प्रमाण पत्र को फर्जी बताकर दाखिल की गई जनहित याचिका (PIL) को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है।
गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरुण भंसाली एवं न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की दो सदस्यीय खंडपीठ ने याचिका को निरस्त कर दिया। यह पीआईएल विजय बहादुर चौधरी द्वारा दाखिल की गई थी।
बताया गया कि मऊ जनपद में गोंड समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) प्रमाण पत्र जारी करने में जिले के अधिकारी अक्सर हीलाहवाली करते हैं। इससे इस समुदाय के युवाओं को शिक्षा, नौकरी एवं सरकारी योजनाओं में काफी नुकसान उठाना पड़ता है।
हाईकोर्ट के इस फैसले से गोंड समाज में उम्मीद बंधी है। वहीं, अन्य जनपदों में भी कुछ तथाकथित लोगों द्वारा गोंड जाति के प्रमाण पत्रों को विवादित साबित कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
इस फैसले का अखिल भारतवर्षीय गोंड महासभा के जिला अध्यक्ष राजेश कुमार गोंड ने स्वागत किया। उन्होंने कहा कि दुखद पहलू यह है कि हाईकोर्ट में रिट दाखिल करने वाले अधिवक्ता अमित कुमार तिवारी एवं ब्रह्मानंद पाण्डेय मऊ जनपद के ही मूल निवासी हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकार की गतिविधियों से यह प्रतीत होता है कि गोंड समुदाय के लोग जाति विशेष का शिकार हो रहे हैं तथा अधिकारियों व कर्मचारियों को भ्रमित कर जनजाति को मिलने वाले अधिकारों से वंचित किया जा रहा है.।


