कश्यप सन्देश

21 May 2026

ट्रेंडिंग

देश और उत्तर प्रदेश के नागरिकों को मिले मुफ्त शिक्षा और मुफ्त चिकित्सा की सुविधा


उत्तर प्रदेश के प्रत्येक नागरिक और उनके परिवार को बेहतर जीवन का अधिकार है। राज्य सरकार को चाहिए कि गरीब, मजदूर, किसान, पिछड़े, वंचित एवं मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चों को निशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जाए, ताकि कोई भी बच्चा आर्थिक अभाव के कारण शिक्षा से वंचित न रहे।
इसी प्रकार प्रदेश के सभी नागरिकों को सरकारी अस्पतालों में मुफ्त एवं बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। गंभीर बीमारियों के इलाज, दवाइयों, जांचों और ऑपरेशन की व्यवस्था पूरी तरह निशुल्क हो, जिससे गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ न पड़े।
शिक्षा और स्वास्थ्य किसी भी समाज की सबसे बड़ी ताकत होते हैं। यदि प्रदेश का हर नागरिक शिक्षित और स्वस्थ होगा, तभी उत्तर प्रदेश विकास की नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।

कृपया इस नंबर पर अपनी राय जरूर भजे  (हाँ) या (नहीं) लिखकर
6387840496
आर.सी.निषाद — संपादक
कश्यप संदेश अख़बार, परिवार कानपुर

देश में भाजपा महिला आरक्षण का पीट रही ढोल, महिला नेतृत्व पर वार-देश में भाजपा का सत्ता के खेल में दोहरा चरित्र उजागर!

बंगाल की महिला मुख्यमंत्री, देश के पुरुष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।

बंगाल।देश की राजनीति में इन दिनों एक अजीब विरोधाभास देखने को मिल रहा है। एक तरफ महिला सशक्तिकरण और आरक्षण की जोरदार पैरवी, तो दूसरी तरफ एक महिला मुख्यमंत्री को सत्ता से हटाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी गई है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लेकर जिस तरह की राजनीतिक घेराबंदी हो रही है, वह कई सवाल खड़े करती है।
केंद्र की सत्ता, जिसका नेतृत्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर रहे हैं, और कई राज्यों के पुरुष मुख्यमंत्री मिलकर बंगाल की राजनीति में सक्रिय नजर आ रहे हैं। आरोप है कि यह सब केवल राजनीतिक प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि एक मजबूत महिला नेतृत्व को कमजोर करने की रणनीति का हिस्सा है।
विडंबना यह है कि यही राजनीतिक धड़े संसद और मंचों पर महिला आरक्षण बिल का जोर-शोर से समर्थन करते हैं। सवाल उठता है कि जब एक महिला नेता सत्ता में है, तब उसे अस्थिर करने की कोशिश क्यों? क्या महिला आरक्षण केवल एक चुनावी मुद्दा बनकर रह गया है?
विश्लेषण बताता है कि यह लड़ाई केवल बंगाल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे देश में राजनीतिक सोच और नैतिकता का आईना बन चुकी है। महिला सशक्तिकरण के नाम पर राजनीति करने वाले दलों की कथनी और करनी में अंतर साफ नजर आता है।
जनता अब यह समझने लगी है कि असली मुद्दा महिला सशक्तिकरण नहीं, बल्कि सत्ता की कुर्सी है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या राजनीति में महिलाओं को बराबरी का अधिकार सच में मिलेगा, या यह सिर्फ भाषणों और नारों तक ही सीमित रहेगा?

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top