कश्यप सन्देश

18 May 2026

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देश और उत्तर प्रदेश के नागरिकों को मिले मुफ्त शिक्षा और मुफ्त चिकित्सा की सुविधा


उत्तर प्रदेश के प्रत्येक नागरिक और उनके परिवार को बेहतर जीवन का अधिकार है। राज्य सरकार को चाहिए कि गरीब, मजदूर, किसान, पिछड़े, वंचित एवं मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चों को निशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जाए, ताकि कोई भी बच्चा आर्थिक अभाव के कारण शिक्षा से वंचित न रहे।
इसी प्रकार प्रदेश के सभी नागरिकों को सरकारी अस्पतालों में मुफ्त एवं बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। गंभीर बीमारियों के इलाज, दवाइयों, जांचों और ऑपरेशन की व्यवस्था पूरी तरह निशुल्क हो, जिससे गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ न पड़े।
शिक्षा और स्वास्थ्य किसी भी समाज की सबसे बड़ी ताकत होते हैं। यदि प्रदेश का हर नागरिक शिक्षित और स्वस्थ होगा, तभी उत्तर प्रदेश विकास की नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।

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आर.सी.निषाद — संपादक
कश्यप संदेश अख़बार, परिवार कानपुर

खैराबाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाओं पर सवाल, मरीजों ने लगाए गंभीर आरोप

मनीष कुमार धुरिया जिला संवाददाता सीतापुर*

उत्तर प्रदेश के जनपद सीतापुर,कस्बा खैराबाद में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की कार्यप्रणाली को लेकर स्थानीय मरीजों एवं तीमारदारों में गहरा रोष व्याप्त है। अस्पताल में उपचार के लिए आने वाले मरीजों का आरोप है कि स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकों की नियमित उपस्थिति नहीं रहती, जिससे मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, अस्पताल में मौजूद मरीजों का कहना है कि दोपहर 12 बजे के बाद अधिकांश चिकित्सक उपलब्ध नहीं रहते और स्वास्थ्य सेवाएं कथित तौर पर केवल डाक्टर विपिन वर्मा चिकित्सक के सहारे चलती हैं। मरीजों ने यह भी आरोप लगाया कि अधिकांश दवाइयां अस्पताल से न देकर बाहर की मेडिकल दुकानों से लिखी जाती हैं, जिन्हें गरीब मरीज खरीदने में असमर्थ रहते हैं, कुछ मरीजों ने नाम न छापने की शर्त पर आरोप लगाया कि अस्पताल से लिखी जाने वाली दवाइयां विशेष मेडिकल स्टोरों से ही ली जाती हैं, जिससे कथित तौर पर कमीशनखोरी को बढ़ावा मिलता है। इसी तरह बाहरी जांचें भी निजी लैब में लिखे जाने के आरोप लगाए गए हैं, स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार द्वारा निरूशुल्क दवा उपलब्ध कराने के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद मरीजों को बाहर से दवा खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। वहीं अस्पताल में अत्यधिक भीड़ के चलते कई बार एक ही बेड पर दो-दो मरीजों को लेटे देखा गया, महिला एवं बाल रोग विशेषज्ञ, नाक-कान-गला विशेषज्ञ की अनुपस्थिति को लेकर भी मरीजों ने नाराजगी जताई। आरोप है कि वरिष्ठ चिकित्सकों के स्थानांतरण के बाद से स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति और बिगड़ गई है, जिससे मजबूरी में मरीज निजी अस्पतालों का रुख कर रहे हैं, रिपोर्टिंग के दौरान जब स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी से दवाओं की उपलब्धता को लेकर सवाल किया गया, तो उनका कहना
था कि जो दवाइयां उपलब्ध नहीं होतीं, वही बाहर से लिखी जाती हैं, हालांकि वे यह स्पष्ट नहीं कर सके कि कौन-कौन सी दवाइयां स्टॉक में नहीं हैं, स्थानीय नागरिकों ने यह भी आरोप लगाया कि आरटीओ मेडिकल प्रमाण पत्र बनवाने वालों को प्राथमिकता दी जाती है और इसके लिए कथित रूप से शुल्क लिया जाता है। लोगों का कहना है कि इससे आम मरीजों की उपेक्षा हो रही है, जनता को अब जिलाधिकारी से अपेक्षा है कि जिस तरह जनपद के अन्य स्वास्थ्य केंद्रों का निरीक्षण कर सुधार कराया गया है, उसी तरह खैराबाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की भी निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हो सके और आमजन को राहत मिल सके।

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