कश्यप सन्देश

लखनऊ में लोक जागरण मंच का ऐतिहासिक सामाजिक भाईचारा मिलन समारोह

लखनऊ। सहीद पथ रोड स्थित अवध विहार क्षेत्र के शिल्प ग्राम में सामाजिक चेतना, संगठन शक्ति और शैक्षिक क्रांति का अद्भुत संगम उस समय देखने को मिला जब लोक जागरण मंच के तत्वावधान में सामाजिक भाईचारा मिलन समारोह का भव्य आयोजन किया गया। हजारों की संख्या में उमड़े जनसैलाब ने यह साबित कर दिया कि समाज अब जाग चुका है, संगठित हो चुका है और अपने अधिकारों व सम्मान के लिए दृढ़ संकल्पित है।
इस ऐतिहासिक आयोजन के मुख्य सूत्रधार दीपू निषाद सागर रहे, जिनके नेतृत्व में कार्यक्रम ने नई ऊंचाइयों को छुआ। उनके अथक प्रयासों ने समाज को एक मंच पर लाकर एक नई दिशा देने का कार्य किया।
कार्यक्रम में अवधेश कुमार साहनी सहित अनेक प्रबुद्धजन, चिंतक और समाजसेवी उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि अब समय आ गया है जब समाज सामाजिक जड़ता को तोड़कर शिक्षा, संगठन और राजनीतिक भागीदारी के माध्यम से अपनी सशक्त पहचान स्थापित करे।
अपने ओजस्वी संबोधन में दीपू निषाद सागर ने कहा—
“जब तक हम संगठित नहीं होंगे, तब तक हमारा समग्र विकास संभव नहीं। शिक्षा ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है, और राजनीतिक भागीदारी हमारा अधिकार।”
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे शिक्षा को हथियार बनाकर समाज के उत्थान की लड़ाई में अग्रणी भूमिका निभाएं। गरीब, वंचित और जरूरतमंद वर्ग के बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने हेतु ठोस रणनीति बनाने पर विशेष बल दिया गया।
समारोह की भव्यता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उत्तर प्रदेश, दिल्ली, बिहार, राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश और गुजरात सहित कई राज्यों से हजारों लोगों ने भागीदारी की। ग्राम प्रधान, जिला पंचायत सदस्य, ब्लॉक प्रमुख एवं विभिन्न क्षेत्रों के समाजसेवी मंच पर एकजुट दिखाई दिए।
कार्यक्रम में अवधेश साहनी, मोतीलाल निषाद, संदीप, प्रशांत, कोमल जी, रमेश निषाद, सुभाष कश्यप, आकाश निषाद एवं अभिषेक सरगम,मनोज मछुआरा कश्यप सन्देश यू पी प्रमुख सहित अनेक गणमान्य ने समाज की एकता, शिक्षा विस्तार और संगठन सुदृढ़ीकरण पर अपने विचार रखे। हर भाषण में जोश, आत्मविश्वास और परिवर्तन की ललक स्पष्ट दिखाई दी।
समारोह का समापन सामाजिक एकता, शैक्षिक उन्नति और संगठन मजबूती के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ। वातावरण नारों और तालियों की गूंज से देर तक गूंजता रहा — “एकता ही शक्ति है” और “शिक्षा से ही विकास” जैसे उद्घोषों ने पूरे आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।
यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक जागरण की नई शुरुआत साबित हुआ।

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