कश्यप सन्देश

21 May 2026

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देश और उत्तर प्रदेश के नागरिकों को मिले मुफ्त शिक्षा और मुफ्त चिकित्सा की सुविधा


उत्तर प्रदेश के प्रत्येक नागरिक और उनके परिवार को बेहतर जीवन का अधिकार है। राज्य सरकार को चाहिए कि गरीब, मजदूर, किसान, पिछड़े, वंचित एवं मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चों को निशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जाए, ताकि कोई भी बच्चा आर्थिक अभाव के कारण शिक्षा से वंचित न रहे।
इसी प्रकार प्रदेश के सभी नागरिकों को सरकारी अस्पतालों में मुफ्त एवं बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। गंभीर बीमारियों के इलाज, दवाइयों, जांचों और ऑपरेशन की व्यवस्था पूरी तरह निशुल्क हो, जिससे गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ न पड़े।
शिक्षा और स्वास्थ्य किसी भी समाज की सबसे बड़ी ताकत होते हैं। यदि प्रदेश का हर नागरिक शिक्षित और स्वस्थ होगा, तभी उत्तर प्रदेश विकास की नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।

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आर.सी.निषाद — संपादक
कश्यप संदेश अख़बार, परिवार कानपुर

देश की  प्रधानमंत्री ‘आयरन लेडी’ इंदिरा गांधी की 41वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि: सोनिया और राहुल गांधी ने किया नमन

राहुल गांधी ने लिखा – दादी कहती थीं भारत के स्वाभिमान से बढ़कर कुछ नहीं

नई दिल्ली, 31 अक्तूबर।
आज देश की पूर्व प्रधानमंत्री और भारत की ‘लौह महिला’ स्व. श्रीमती इंदिरा गांधी की 41वीं पुण्यतिथि पर कांग्रेस नेताओं ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने दिल्ली स्थित शक्ति स्थल पर पहुंचकर पुष्पांजलि दी।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर अपनी दादी को याद करते हुए लिखा—

“भारत की इंदिरा — हर ताकत के सामने निडर, दृढ़ और अडिग। उन्होंने हमें सिखाया कि भारत के स्वाभिमान से बढ़कर कुछ नहीं।”

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी उन्हें नमन करते हुए कहा—

“इंदिरा गांधी जी ने भारत की एकता और अखंडता की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। वे सशक्त नेतृत्व, दृढ़ निश्चय और देशभक्ति की प्रतीक थीं।”

सोनिया गांधी ने श्रद्धांजलि संदेश में लिखा—

“भारत की ‘लौह महिला’ इंदिरा गांधी देश की एकता हेतु प्राण न्योछावर करने वाली प्रेरणा हैं।”

इंदिरा गांधी की शहादत का दिन

31 अक्तूबर 1984 की सुबह दिल्ली में हल्की सर्दी के साथ एक सामान्य दिन की तरह शुरू हुई थी। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने रोज़ की तरह सुबह छह बजे उठकर संतरे का जूस और उबले अंडे का हल्का नाश्ता किया। उन्हें पता नहीं था कि कुछ ही घंटों में देश को झकझोर देने वाली घटना घटने वाली है — प्रधानमंत्री निवास के भीतर उनके अपने ही सुरक्षा कर्मियों ने उन पर गोलियां चला दीं। यह क्षण भारतीय राजनीति के इतिहास में अमिट बन गया।

देशहित में अदम्य साहस की मिसाल

इंदिरा गांधी ने अपने कार्यकाल में देश की एकता, अखंडता और आत्मसम्मान को सर्वोच्च रखा।
1971 के भारत-पाक युद्ध में उन्होंने ऐतिहासिक नेतृत्व दिखाया और बांग्लादेश का निर्माण हुआ। इसी के बाद तत्कालीन विपक्ष के नेता अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें “दुर्गा” कहकर संबोधित किया था।
उनका बेलछी गाँव का दौरा, जहाँ वे जातीय हिंसा के पीड़ित परिवारों से मिलने ट्रैक्टर, जीप और हाथी से होकर पहुँचीं, आज भी उनके संवेदनशील नेतृत्व की प्रतीक कथा के रूप में याद किया जाता है।

सरदार पटेल को भी दी श्रद्धांजलि

इसी दिन देश के प्रथम गृह मंत्री लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर भी कांग्रेस नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
संसद भवन के सेंट्रल हॉल में मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने पुष्पांजलि अर्पित कर देश की एकता, अखंडता और प्रशासनिक क्षमता में पटेल के योगदान को नमन किया।

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