


कानपुर। सहकार भारती की दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी की प्रथम दिवसीय बैठक का शुभारंभ शनिवार को रॉयल आनंद रिसॉर्ट टिकरा में हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय जोशी, राष्ट्रीय महामंत्री दीपक चौरसिया, संघ प्रचारक भवानी भीख, प्रदेश अध्यक्ष अरुण कुमार सिंह एवं प्रदेश महामंत्री अरविंद दुबे ने भारत माता तथा लक्ष्मण राव इनामदार के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन कर किया।
कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों का अंगवस्त्र एवं प्रतीक चिन्ह भेंट कर स्वागत व सम्मान किया गया।
अपने संबोधन में राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय जोशी ने कहा कि दो वर्ष बाद सहकार भारती अपना रजत जयंती वर्ष मनाने जा रही है। उन्होंने संगठन के ध्येय वाक्य “बिना संस्कार नहीं सहकार” को दोहराते हुए कहा कि संगठन को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर कार्य करना चाहिए। उन्होंने परिवारवाद पर भी प्रश्न उठाते हुए कहा कि सहकारिता में वंशवाद का कोई स्थान नहीं होना चाहिए।
राष्ट्रीय महामंत्री दीपक चौरसिया ने वैश्विक असमानता पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि विश्व में एक प्रतिशत लोगों के पास 45 प्रतिशत संपत्ति का स्वामित्व है। उन्होंने बताया कि यूरोप में सहकारिता की जीडीपी में हिस्सेदारी लगभग 8 प्रतिशत है, जबकि भारत में यह चार से पांच प्रतिशत के बीच है। उन्होंने कहा कि सहकारिता ही समाज को आत्मनिर्भर बनाने का सशक्त माध्यम है।
संघ प्रचारक भवानी भीख ने कार्यक्रम में मातृशक्ति की उल्लेखनीय भागीदारी पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह एक सकारात्मक संकेत है। उन्होंने शताब्दी वर्ष के अवसर पर संगठनात्मक एकता, सामाजिक समरसता और “पंच परिवर्तन” पर विशेष जोर दिया।
प्रदेश अध्यक्ष अरुण कुमार सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम की मेजबानी प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने राष्ट्रीय नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इससे प्रदेश के कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा है।
उद्घाटन सत्र के समापन पर प्रदेश उपाध्यक्ष डीपी पाठक ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन प्रदेश महामंत्री अरविंद दुबे ने किया। कार्यक्रम में मत्स्य प्रकोष्ठ से राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंती भाई केवट, उत्तर प्रदेश से कैलाश नाथ निषाद,सुशील कुमार सहित सम्पूर्ण देश के कार्यकर्ता उपस्थित रहे।व्यवस्था में प्रमुख रूप से नीरज त्रिपाठी, दिनेश कटियार, चन्द्र प्रकाश अग्निहोत्री, दीपेन्द्र सिंह सेंगर आदि प्रमुख रूप से रहे।


