कश्यप सन्देश

18 May 2026

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देश और उत्तर प्रदेश के नागरिकों को मिले मुफ्त शिक्षा और मुफ्त चिकित्सा की सुविधा


उत्तर प्रदेश के प्रत्येक नागरिक और उनके परिवार को बेहतर जीवन का अधिकार है। राज्य सरकार को चाहिए कि गरीब, मजदूर, किसान, पिछड़े, वंचित एवं मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चों को निशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जाए, ताकि कोई भी बच्चा आर्थिक अभाव के कारण शिक्षा से वंचित न रहे।
इसी प्रकार प्रदेश के सभी नागरिकों को सरकारी अस्पतालों में मुफ्त एवं बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। गंभीर बीमारियों के इलाज, दवाइयों, जांचों और ऑपरेशन की व्यवस्था पूरी तरह निशुल्क हो, जिससे गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ न पड़े।
शिक्षा और स्वास्थ्य किसी भी समाज की सबसे बड़ी ताकत होते हैं। यदि प्रदेश का हर नागरिक शिक्षित और स्वस्थ होगा, तभी उत्तर प्रदेश विकास की नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।

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आर.सी.निषाद — संपादक
कश्यप संदेश अख़बार, परिवार कानपुर

आदिवासी परंपरा में टेसू और झिंझिया का विवाह: नारायणपुरवा, परौख में अनोखी प्रथा:जयवीर सिंह निषाद,ब्यूरो इंचार्ज,कानपुर देहात

कानपुर देहात के ब्यूरो इंचार्ज जयवीर सिंह निषाद ने बताया कि निषाद समुदाय की एक महत्वपूर्ण आदिवासी परंपरा का आयोजन नारायणपुरवा, परौख गाँव में हुआ। इस परंपरा के अनुसार, हिंदू कैलेंडर के अनुसार कुंवार की रामनवमी से टेसू और झिंझिया दोनों मिट्टी के पुतले का खेल शुरू होता है। टेसू पुरुषों की टोली का नेतृत्व करते हैं, जबकि झिंझिया युवतियों की टोली का। दोनों टोलियाँ अपने-अपने समुदाय के घरों में जाकर लड़कियों के साथ मिलकर शरद पूर्णिमा को टेसू और झिंझिया के विवाह का निमंत्रण देती हैं।

इस परंपरा के माध्यम से नए युवक-युवतियाँ लोकगीतों का आनंद लेते हैं और इसका पूरा मनोरंजन करते हैं। यह आदिवासी परंपरा सदियों से चली आ रही है, और पूरा समुदाय इस खेल के माध्यम से अपनी संस्कृति को जीवित रखता है।टेसू, झिंझिया के खेल में यह ध्यान रखा जाता है कि विवाह से पहले टेसू और झिंझिया का मिलन न हो सके। यह परंपरा उच्च आदर्शों को स्थापित करती है और पुरानी परंपराओं को जीवित बनाए रखती है।

शरद पूर्णिमा की रात को इस अनोखे विवाह में श्री राम प्रसाद निषाद, शिवराम निषाद,जग्गू, छोटू, प्रमोद मदन, आंनद,रवीना, ज्योति, कमला, नीतू देवी, आरती देवी, ओमवती निषाद, केशी देवी, मीरा देवी, फूल श्री देवी, आरती देवी चंदावती, सिवकली देवी, शान्ती देवी आदि ने भाग लिया। इस अवसर पर धान से बनी हुई लाई का वितरण किया गया। इस कार्यक्रम के बाद ही समुदाय में वास्तविक विवाह का आयोजन शुरू हो जाता है।

इस प्रकार यह परंपरा न केवल समाज को सांस्कृतिक रूप से समृद्ध करती है, बल्कि युवाओं को अपने लोकगीतों और संस्कारों से भी जोड़ती है।

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