
किदवई नगर में काव्य-संध्या का आयोजन
कानपुर दक्षिण क्षेत्र स्थित किदवई नगर मे
चिकित्सा जगत की व्यस्तताओं से इतर, एक शाम साहित्य, संवेदना और हास्य के रंगों में सराबोर रही। दि होम्योपैथिक मेडिकल एसोसिएशन ऑफ इंडिया, कानपुर यूनिट द्वारा इंडियन होम्योपैथिक चेरिटेबल हॉस्पिटल, एम ब्लॉक, किदवई नगर में आयोजित काव्य-संध्या में शहर के नामचीन कवि और चिकित्सक एक मंच पर जुटे। इस अनूठे आयोजन ने साहित्य और चिकित्सा के बीच भावनात्मक संवाद स्थापित किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि अशोक शास्त्री ने की, जबकि संचालन की जिम्मेदारी अरुण तिवारी ‘गोपाल’ ने निभाई। शुभारंभ मां वीणावादिनी की वंदना से हुआ, जिसने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊंचाई प्रदान की।
काव्य प्रस्तुति की प्रमुख झलकियां—
डॉ. प्रदीप तिवारी ने अपनी रचना— “वह एक महान मानव जन्मा, जिससे कृत-कृत्य हुई धरती, वह तेज पुंज से हेनीमन, शत-शत प्रणाम करती जगती…” —से मानवता की ऊंचाइयों को छुआ।
अशोक शास्त्री ने बेटियों पर केंद्रित अपनी भावपूर्ण रचना— “सारी मांगे पूरी करता जो चाही अनचाही, याद वही घर कर लेता है तुमको छठे छमाही…” —से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
डॉ. दीप कुमार शुक्ल ने हास्य की धार बहाते हुए कहा—
“वीर रस के कवि कहते हैं, मर्द को कभी दर्द नहीं होता है,
श्रृंगार रस के कवि कहते हैं, प्यार में बहुत दर्द होता है,
हास्य रस का कवि कन्फ्यूजन में है—
क्या प्यार करने वाला मर्द नहीं होता है…”
—जिस पर सभागार ठहाकों से गूंज उठा।
बृजेंद्र प्रताप सिंह की ओजस्वी रचनाओं ने तालियों की गड़गड़ाहट से हाल को गुंजायमान कर दिया।
नवगीतकार अरुण तिवारी ‘गोपाल’ ने अपनी सुमधुर प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को गरिमा प्रदान की।
कार्यक्रम का संयोजन डॉ. एस.बी. सिंह ने किया। मुख्य वक्ता डॉ. पुनीत मिश्र ने अपने व्याख्यान में सर्दी के मौसम में पानी की कमी से शरीर पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों और उससे उत्पन्न बीमारियों पर प्रकाश डालते हुए बचाव के उपाय बताए।
इस अवसर पर डॉ. अनिल उमराव, डॉ. सुधाकर औदिच्य, डॉ. दिवाकर तिवारी, डॉ. पंकज आर्य, डॉ. विवेकानंद, डॉ. पी. के. सचान सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि चिकित्सा केवल शरीर का उपचार नहीं, बल्कि संवेदना और सृजन से जुड़ी मानवीय साधना भी है।


