
नई दिल्ली।
बीजिंग में आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के आगामी शिखर सम्मेलन से पहले देश में लागू श्रम विधेयकों (लेबर कोड्स) को लेकर ट्रेड यूनियन आंदोलन से जुड़े वरिष्ठ नेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में श्रम कानूनों से उत्पन्न चुनौतियों, मजदूरों पर पड़ रहे प्रभाव और उनके अंतरराष्ट्रीय निहितार्थों पर गहन चर्चा हुई।
बैठक में HMS के अध्यक्ष कॉमरेड हरभजन सिंह सिद्धू, AIDEF के अध्यक्ष कॉमरेड एस.एन. पाठक, कॉमरेड वीरेंद्र निषाद, कॉमरेड जे.के. यादव एवं कॉमरेड जय सरन सिंह प्रमुख रूप से शामिल रहे। सभी नेताओं ने एक स्वर में कहा कि नए श्रम कानून मजदूरों के हितों के प्रतिकूल हैं और संगठित व असंगठित—दोनों क्षेत्रों के श्रमिकों के अधिकारों को कमजोर कर रहे हैं।
नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि बीजिंग में होने वाले ILO शिखर सम्मेलन में भारत में श्रमिक अधिकारों की वास्तविक स्थिति को मजबूती से अंतरराष्ट्रीय मंच पर रखा जाएगा। इसके लिए साझा रणनीति बनाने पर भी विचार-विमर्श किया गया।
बैठक को संबोधित करते हुए कॉमरेड हरभजन सिंह सिद्धू ने कहा,
“श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा, सामूहिक सौदेबाजी और हड़ताल के अधिकारों को कमजोर किया जा रहा है, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।”
वहीं AIDEF अध्यक्ष कॉमरेड एस.एन. पाठक ने श्रम कानूनों में व्यापक संशोधन की मांग को दोहराते हुए कहा कि वर्तमान लेबर कोड्स मजदूर विरोधी हैं।
बैठक के अंत में कॉमरेड वीरेंद्र निषाद ने सभी श्रमिक संगठनों से मजदूर एकता को और मजबूत करने तथा श्रमिक हितों की रक्षा के लिए संयुक्त संघर्ष को तेज करने का आह्वान किया।


